प्रतिमा दूध नहीं पीती, द्रवों की गति व तनाव से ऐसा होता हैः सारिका

DG NEWS BHOPAL

संवाददाता सुरेश मालवीय 8871288482

भोपाल । इन दिनों अनेक स्थानों पर नंदी की प्रतिमा के दूध पीने की अफवाह है। जिसके चलते कुछ स्थानों पर प्रतिमा को दूध पिलाने भीड़ भी एकत्र हो रही है। इस तरह की अफवाह को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान प्रसारिका सारिका घारू ने बताया अंधविश्वास बताया है। उन्होंने डीजी न्यूज से बातचीत में कहा कि कोई भी प्रतिमा दूध नहीं पीती है, बल्कि द्रवों की गति, पृष्ठ तनाव, आसंजन और संबंद्धता जैसे भौतिक गुणों के कारण ऐसा प्रतीत होता है। सारिका ने कहा कि पृष्ठ तनाव यानी सरफेस टेंशन द्रवों का वह गुण है जिससे वह अपने क्षेत्रफल को कम से कम बनाए रखने का प्रयास करता है। द्रवों के अंतर आणविक बल से उत्पन्ना इस तनाव के कारण द्रव की ऊपरी परत इलास्टिक शीट की तरह व्यवहार करती है। अगर किसी बंद किए नल की टोंटी से टपकती बूंद को स्पर्श किया जाए तो वह सरक कर हाथ में आ जाती है। इसी प्रकार जब दूध से भरे चम्मच को किसी बाहर की ओर से निकली आकृति वाली मूर्ति से स्पर्श किया जाता है तो दूध का पृष्ठ तनाव द्रव को ऊपर की ओर चम्मच से बाहर खींचता है। खिंचने के बाद गुरुत्वाकर्षण के कारण यह दूध मूर्ति से नीचे की ओर सरक जाता है। आस्था के कारण दूध के नीचे की ओर सरकने पर ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि यह भ्रम होता है कि मूर्ति दूध पी रही है। सारिका ने कहा कि यदि आप कुपोषित बच्चों व जरूरतमंदों के लिए दूध उपलब्ध करा सकते हैं तो ईश्वर अवश्य प्रसन्ना होंगे।

खाली डिब्बे को दूध पिलाने का प्रयोग किया

सारिका ने अंधविश्वास को दूर करने के लिए विज्ञानिक तथ्यों की पुष्टि करते हुए खाली डिब्बे को दूध पिलाने का प्रयोग किया। उन्होंने डिब्बे के नुकीले सिरे पर पर दूध से भरी चम्मच रखी। देखते ही देखते चम्मच से दूध गायब हो गया। वास्तव में यह दूध डिब्बे से होता हुआ नीचे प्लेट में जमा हो गया था।

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