सांसद गुमानसिंह डामोर ने लोकसभा में मनरेगा में जाॅब कार्ड पर 200 दिन रोजगार एवं 300 रुपये प्रतिदिन मजदुरी देने की मांग उठाई

झाबुआ। क्षेत्रीय सांसद गुमानसिंह डामोर रतलाम, झाबुआ एवं आलीराजपुर जिले के विकास के लिये संसद से लेकर विभिन्न मंचों पर समय समय पर आवाज उठा कर इस अंचल की बेहतरी के लिये जो भूमिका का निर्वाह किया जारहा है उसे लेकर समुचे अंचल में उनके प्रयासों की भूरी भूरी प्रसंशा की जारही है। सांसद डामोर ने जहां रेल्वे लाईन के लिये सदन के अलावा मंत्रीस्तर से लेकर आला अधिकारियों तक से भेंट करके विभिन्न विकासोन्मुखी कार्यो के लिये अपने प्रयासों से झाबुआ,रतलाम एवं आलीराजपुर जिले के त्वरित विकास को गति दी है, वही लोकसभा में भी प्रश्नों के माध्यम से अंचल की समस्याओं को लेकर सदन का ध्यान भी आकर्षित करके उल्लेखनीय कदम उठाने मे पीछे नही रहे है। वर्तमान में लोकसभा के सत्र में भी सांसद गुमानसिंह डामोर ने प्रश्नकाल में पूरे संसदीय क्षेत्र को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का सफल कार्य किया है । शुक्रवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान रतलाम झाबुआ आलीराजपुर के सांसद गुमानसिंह डामोर ने सदन के माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध किया कि वे उनके लोकसभा क्षेत्र के सैलाना,पेटलावद, थांदला,अलीराजपुर,जोबट, झाबुआ जो जनजातीय क्षेत्र हैं ,यहां पर छोटे किसान व मजदूर निवासरत है, मध्य प्रदेश में मनरेगा योजना के तहत एक परिवार को औसत 100 दिन की मजदूरी जॉब कार्ड पर दी जा रही है। जो कि गरीब आदिवासी मजदूरों के परिवार संचालन की दृष्टि से अपर्याप्त है क्योकि इस संसदीय क्षेत्र में ऐसे लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं और जो भूमिहीन किसान हैं । उनको साल में कम से कम 200 दिन का रोजगार दिया जाए ताकि उनको अन्यत्र पलायन करने या रोजगार के लिये यत्र-तत्र जाना नही पडें । श्री डामोर के अनुसार मजदूरी भी अन्य राज्यों की तरह कम से कम 300 रुपये प्रतिदिन के मान से दी जाना चाहिये ताकि इन गरीब लोगों को जीवन यापन मे परेशानिया नही झेलना पडे ।उन्हाने सदन के माध्यम से मांग की कि सरकार इसे गंभीरता से लेकर ऐसे परिवारों को मनरेगा के तहत 300 रूप्ये प्रतिदिन के मान से मजदुरी तय करके तथा कम से कम 200 दिनों के लिये रोजगार दिये जाने के लिये सहानुभूति पूर्वक विचार कर मान्य करें। इसके साथ ही सं सांसद डामोर ने संसद में कहा कि प्रधानमंत्री आवास में शोैचालयों के बनाने की अनिवार्यता नहीं है । पहले जिन्हें समग्र स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय मिल चुके है उनका आवास से स्थान में बदलाव हो रहा है, ऐसे में नवनिर्मत होने वाले प्रधानमंत्री आवास में भवन निर्माण के साथ ही शौचालय का निर्माण भी जनहित में ही होगा। सांसद डामोर ने कहा कि संसदीय क्षेत्र के झाबुआ जिले को वर्ष 2018 में ओडीएफ घोषित हो गया है किन्तु अभी भी 25 से 30 प्रतिशत आबादी खुले में शौच के लिये जा रही है, इसलिए उन्होने मंत्रीजी से अनुरोध किया कि प्रधानमंत्री आवास के साथ शौचालय निर्माण की अनिवार्यता की जावे, ताकि खुले मे शौच करने की आदत को बदला जासकते तािा समग्र स्वच्छता अभियान में कोई अवरोध नही आए. सांसद श्री डामोर ने सदन में मांग उठाकर संसदीय क्षेत्र में शत प्रतिशत शौचालय के माध्यम से स्वच्छ भारत मिशन को अमली जामा पहिनाने के लिये सरकार ने अनुरोध किया। उनके इस प्रयास की पूरे संसदीय क्षेत्र में प्रसंशा की जारही है। उक्त जानकारी भाजपा आईटी सेल प्रभारी अर्पित कटकानी ने दी ।

Leave a Reply