प्रधानमंत्री आवास योजना में मकानों का दाम कम बताकर अफसरों ने हितग्राहियों को किया गुमराह, जानिए आगे का संकट

इडब्ल्यूएस योजना के मकानों की कीमत 4.75 लाख शासन ने तय की थी, अफसरों ने दो लाख में कराया पंजीयन
– नगर निगम आयुक्त ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर मांगा मार्गदर्शन


रीवा। प्रधानमंत्री आवास योजना में नगर निगम के अधिकारियों ने शासन के निर्देशों के विपरीत जाकर हितग्राहियों को धोखे में रखा। योजना के तहत बनाए जा रहे मकानों की कीमत सही नहीं बताई गई, जिसकी वजह से करीब दो हजार की संख्या में हितग्राहियों से अब निगम प्रशासन नियमों के तहत अधिक राशि जमा कराने के लिए कह रहा है। अफसरों की मनमानी के चलते अब लोगों ने योजना के तहत मकान ही लेने से इंकार कर दिया है।

विरोधाभाष की बनी स्थिति के बीच अब नगर निगम आयुक्त ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए मार्गदर्शन मांगा है। साथ ही हितग्राहियों के लिए क्या किया जा सकता है, इसके लिए भी निर्देश जारी करने की मांग की है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रीवा नगर निगम को एएचपी घटक के तहत इडब्ल्यूएस के 2240, एलआइजी के 576, एमआइजी 216 एवं 309 दुकानों के निर्माण के लिए 265.55 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। बाद में राशि 283.60 करोड़ रुपए कर दी गई।

इडब्ल्यूएस के 660 मकान पूरे हो चुके हैं, शेष निर्माणाधीन हैं। पूर्व में नगर निगम के अधिकारियों ने शासन द्वारा निर्धारित किए गए इडब्ल्यूएस मकानों की कीमत 7.10 लाख रुपए बताई थी। जिसमें दो लाख रुपए हितग्राही से लिया जाना था। इस दो लाख रुपए में 20 हजार रुपए लेकर पंजीयन कराया गया और शेष 1.80 लाख रुपए बैंक फाइनेंस कराने की बात कही गई थी। अधिकारियों ने हितग्राहियों को यह नहीं बताया कि दो लाख रुपए केवल स्लम बस्ती में रहने वाले लोगों के लिए है।

योजना की सही जानकारी हितग्राहियों को नहीं दिए जाने पर अब नगर निगम आयुक्त ने शासन से मार्गदर्शन मांगा है। इसमें तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं। बीते कुछ महीनों के बीच आवास योजना के तेजी से कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें बीएलसी घटक के करीब 1400 हितग्राहियों के मकानों की किश्त जारी कर मकान पूरे कराए गए हैं।


– दो लाख में पंजीयन, अब 4.75 लाख मांग रहे
नगर निगम ने इडब्ल्यूएस के मकानों के लिए सभी हितग्राहियों से दो लाख रुपए जमा करने के लिए कहा था। इसकी तहत 20 हजार रुपए लेकर 2240 हितग्राहियों का पंजीयन भी कर लिया। पूर्व के अधिकारियों का तबादला हुआ और नए अधिकारी आए तो इन्होंने स्लम और नॉन स्लम बस्ती का क्राइटेरिया बताते हुए कहा कि स्लम एरिया के हितग्राहियों को दो लाख रुपए और नान स्लम के हितग्राहियों से 4.75 लाख रुपए मकानों के लिए जाएंगे। पंजीयन में केवल 300 हितग्राही ही स्लम बस्तियों में रहने वाले हैं, जबकि 1940 लोग नान स्लम के हैं।

सभी को दो लाख रुपए देने के लिए कहा गया था, अब अधिक राशि मांगे जाने के चलते हितग्राहियों से ने योजना के तहत मकान लेने से ही इंकार करना शुरू कर दिया है। करीब तीन सौ से अधिक लोगों ने अपनी पंजीयन राशि वापस ले ली है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्हें गुमराह किया जा रहा है, इसलिए अब मकान नहीं लेंगे।


– 2016 में नियम बना था फिर भी किया गुमराह
निगम आयुक्त ने प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि 21 जनवरी 2016 को शासन द्वारा जारी आदेश में ही स्पष्ट किया गया था कि स्लम एरिया के हितग्राहियों के लिए केन्द्र एवं राÓय सरकार 1.50-1.50 लाख रुपए अंशदान दिया जाएगा। जबकि नान स्लम एरिया के हितग्राहियों के लिए केवल केन्द्र सरकार 1.50 लाख रुपए का अंशदान देगी। इस वजह से नान स्लम एरिया के हितग्राहियों से 4.75 लाख रुपए लिया जाएगा और स्लम एरिया वालों से दो लाख रुपए लिए जाएंगे। इसके बावजूद अधिकारियों ने लोगों को नियम नहीं बताया। अब भाजपा के लोगों ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने से रुपए बढ़ाए गए हैं। निगम आयुक्त ने अपने पत्र स्पष्ट किया है कि इडब्ल्यूएस के मकानों की दो कीमतें पहले से निर्धारित थी। इसलिए जिन अधिकारियों ने गुमराह किया है, उन पर कार्रवाई का मार्गदर्शन मांगा है।


– पंपलेट भी शहर में बांटे थे
निगम के अधिकारियों ने पूर्व में शहर में इस आशय का पंपलेट भी बांटा था कि पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर मकान दिए जाएंगे। इसके लिए हितग्राही को दो लाख रुपए देने होंगे। पंजीकृत किए गए नान स्लम एरिया के लोग अब उसी पंपलेट का हवाला देकर अधिक राशि देने से इंकार कर रहे हैं। निगम आयुक्त ने अपने पत्र में उस पंपलेट को भी संलग्र किया है। 
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प्रधानमंत्री आवास योजना के इडब्ल्यूएस मकानों की कीमत पहले दो लाख रुपए बताई गई थी, जबकि 4.75 लाख भी लिए जाने का प्रावधान था। तब के अधिकारियों ने पूरी जानकारी हितग्राहियों को नहीं दी थी। अब नियम लोगों को बताया जा रहा है तो वे पूर्व में दिए गए निगम के पंपलेट का हवाला दे रहे हैं। इसलिए शासन से मार्गदर्शन मांगा है। 
सभाजीत यादव, आयुक्त नगर निगम

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