सेवानिवृत्त सीएमओ रियाजुद्दीन कुरैशी के खिलाफ एफआईआर मामला ! जांच में दोषी पाये जाने व कलेक्टर के निर्देशो के पांच माह बाद भी प्रकरण दर्ज नही किया गया ।

नीमच। भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई में देरी साफ तौर पर भ्रष्टाचारी की मदद को इंगित करती है. कार्रवाई में सुस्ती से यही प्रतीत होता है की कहीं ना कहीं आरोपित सक्षम है और सिस्टम उसके दबाव में हैं. भले प्रदेश का मुखिया चिल्लाता रहे की ‘ माफीयाओं को जिंदा गाढ़ दुंगा” या “दोषीयों को बख्शा नही जायेगा”,  मगर असली सुशासन और अधिकारीयों की मंशा मुख्यमंत्री के ‘डायलॉग’ के अनुरूप है या नही वो भ्रष्टाचार के मामलों में ऐसी सुस्ती से समझ आ जाता है.
सरकार और जनप्रतिनिधी सुशासन के लाख दावे कर लें लेकिन प्रशासनिक अधिकारीयों की कार्यशैली इन दावों को खोखला ही साबित करती हैं. भ्रष्टाचार और माफीयाओं के विरुद्ध आम जनता की सुनवाई ना होना आम बात है, मगर शिकायतकर्ता सत्ता पक्ष से जुड़े विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष हों और उसके बाद भी कार्रवाई ना हों तो यह आसानी से समझ में आता है की ब्युरोक्रेसी सिस्टम में किस कदर हावी है.
नीमच के पूर्व सीएमओ रियाजुद्दीन कुरैशी भ्रष्टाचार के कई आरोप साथ ले कर रिटायर हो गये. मगर एक आरोप उन पर साबित हुआ जिस पर कलेक्टर की मुहर भी लग गई. जांच उपरांत नीमच कलेक्टर द्वारा सेवानिवृत्त सीएमओ कुरैशी पर प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिये गये. मगर 5 माह बाद भी प्रकरण दर्ज नही हो पाया है.
लगभग एक वर्ष पूर्व जब प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री थे. भाजपा नेता व पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राकेश पप्पु जैन ने स्कीम नम्बर 36 बी के भुखंड क्रमांक 1056  के एक भाग के अवैध रूप से आवंटन की शिकायत कलेक्टर से की थी. यही नही नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार व कई कॉंग्रेसी नेताओं ने भी उक्त भूखंड के अवैध आवंटन को निरस्त कर कार्रवाई की मांग की थी.
शिकायत पर तत्कालीन कलेक्टर जितेंद्र सिंह राजे ने जांच में पाया की तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी रियाजुद्दीन कुरैशी द्वारा नगरपालिका की उक्त बहुमुल्य सम्पत्ति को अवैध रूप से रामभरोसे को अनुचित लाभ पहुंचाने की दृष्टी से अवंटित किया गया और पंजियन भी करवाया गया. जांच उपरांत कलेक्टर नीमच द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी के मार्फत केंट थाना प्रभारी को पूर्व सीएमओ रियाजुद्दीन कुरैशी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिनांक 5-11-20 को दे दिये गये थे. लेकिन कलेक्टर के स्पष्ट आदेशों के 5 माह बाद भी नगर पालिका व पूलिस के अधिकारी प्रकरण दर्ज करने में उदासीनता क्यों बरत रहे हैं, यह समझ से परे है ! कलेक्टर की जांच उपरांत पूर्व सीएमओ कुरैशी द्वारा अवैध आवंटन किया जाना पाये जाने व उन पर प्रकरण दर्ज करने के स्पष्ट निर्देशों के बावजुद पूलिस द्वारा प्रकरण दर्ज ना करते हुए नगर पालिका से पत्राचार में अतिरिक्त जानकारी मांगी गई. जिसके बाद नगर पालिका नीमच द्वारा उक्त जानकारी देने में समय लिया गया. ना जाने क्यों उक्त मामले में पूलिस व नगर पालिका के अधिकारी दस्तावेजों की फूटबॉल खेलने में व्यस्त हैं!

कुछ अतिरिक्त जानकारियां पूलिस द्वारा मांगी गई थी वो दे दी हैं और मैं अपने बयान भी दर्ज करवा चुका हूं. प्रकरण दर्ज करने में देरी पर वास्तविक जानकारी टीआई केंट ही दे पायेंगे –सीएमओ सीपी रॉय

प्रकरण दर्ज करने में हो रही देरी के संबंध में जानकारी लेने पर केंट थाना टीआई अजय सारवान ने कहा की उक्त मामले में डीपीओ से अभिमत लिया जा रहा है. शीघ्र ही प्रकरण दर्ज किया जायेगा.

वहीं विधी के जानकारों का कहना है की कलेक्टर के स्प्ष्ट निर्देशों पर मुख्यनगर पालिका अधिकारी सीपी रॉय के आवेदन देने के उपरांत नीमच पूलिस को तत्काल श्री कुरेशी के खिलाफ प्रकरण दर्ज करना चाहिये.

विधी विशेषज्ञ व कॉंग्रेस नेता एडवोकेट महेश पाटीदार ने कहा की -” इस मामले में नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ ने अमानत में खयानत की और सम्पत्ति का अवैध आवंटन करवाया है जो गंभीरतम अपराध है. वर्तमान सीएमओ द्वारा प्रकरण दर्ज किये जाने के आवेदन पर धारा 154 सीआरपीसी के तहत पूलिस का प्राथमिक कर्तव्य है की वो तत्काल FIR दर्ज करें जिससे आरोपी संरक्षित ना हों और रेकॉर्ड प्रभावित ना हों. ऐसी अवैध आवंटन की गतिविधीयों को रोकने के लिये तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिये.”

पूर्व कलेक्टर द्वारा निर्देश दिये गये हैं तो फिर तो प्रकरण दर्ज होना ही चाहिये, आपने मामले की जानकारी दी है मैं दिखवा लेता हूं की क्यों देरी हो रही है –मयंक अग्रवाल, कलेक्टर नीमच

कलेक्टर कार्यालय से नस्ती प्राप्त हुई थी, नस्ती अध्य्यन अवलोकन के लिये सीएसपी नीमच को भेजा गया था, क्या आवश्यक दस्तावेज चाहिये या फिर इस तरह की धोखाधड़ी या फ्रॉड के केसेसे में प्रारम्भिक जांच के संदर्भ में डिटेल प्रतिवेदन मिलते ही उसी अनुसार कार्र्वाई की जाएगी –सूरज कुमार वर्मा, एसपी नीमच

भुखंड क्रमांक 1056 के अवैध आवंटन की शिकायत मेरे द्वारा की गई थी जो जांच में सही पाई गई. सीएमओ कुरैशी द्वारा आवंटन को परिषद के सामने नही लाया गया ना ही प्रशासक के समक्ष. उन्हे कानूनन कोई अधिकार नही था यह आवंटन करने का, पद का दुरुपयोग व अमानत में खयानत करते हुए 3 से 4 करोड़ रुपये के भुखंड की ओने पोने दामों में रजिस्ट्री करवा दी गई. कलेक्टर द्वारा जांच कर रियाजुद्दीन कुरैशी के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिये गये हैं.-पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राकेश पप्पु जैन

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