मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति पर अत्याचार थमने का नाम नहीं !

दबंग ठाकुर ने की :हरप्रसाद अहिरवार की हत्या मोका पर मौत।

भोपाल (मूलचंद मेंधोनिया सहसंपादक कबीर मिशन पत्रिका भोपाल की रिपोर्ट) आखिर अत्याचार और जुल्म जातिगत आधार पर कब तक चलेगा? आज जब हम लोग इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं। तब भी मध्यप्रदेश में सदीयों से सताये जाने वाले अनुसूचित जाति वर्ग के साथ बैसा ही बर्ताव जो लगातार सदीयों से चला आ रहा है। आज के समय तो बदलाव आना चाहिए था। जब भाजपा और उसके सहयोगी संगठन एवं उनके नेता इस प्रकार के समय को “रामराज्य” कह रहे है। तब भी वैसा ही अत्याचार प्रदेश ओर देश के कोने-कोने में जारी है। फिर तो यह बहुत शर्मनाक और भर्त्सना जनक है।
मध्यप्रदेश के विदिशा तहसील कुरवाई के गांव – पिकलौन में संत शिरोमणि रविदास रविदास मंदिर की जमीन के अंदर से दबंगई कर ठाकुरों द्रारा रास्ता जबरिया से लिया जा रहा था। जो कि नाजायज था, जबकि मंदिर के अलावा मुख्य रास्ता पूर्व से थी। वहां से न जाकर ठाकुर अपनी दबंगई के वल के घमंड और जातिगत भेदभाव के कारण ये ठाकुर दुनिया के संतों में सर्वश्रेष्ट संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के मंदिर में से ही रास्ता लेने का विवाद यूं किया कि फेंनसिंग और हैंडपंप उखाड़ फैक दिया। ये मना करने पर दबंग ठाकुरों ने मंदिर की देखरेख करने वाले श्री हरप्रसाद अहिरवार को धारदार हथियार से हमला कर मोके पर ही मौत के घाट उतार दिया। जातिसूचक गाली देने ओर हरप्रसाद अहिरवार की मौत करने वाले का विरोध एवं बचाव में आने वाले एक अन्य अहिरवार समाज के व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल कर दिया है। जो कि विदिशा जिला चिकित्सालय में इलाज हेतु भेजा गया है।
इतनी बड़ी घटना होती है सौ डायल करने पर पुलिस प्रशासन घंटों बाद आती है। लगता है कि प्रशासन की सांठगांठ तो नहीं हो रही है। जबकि मृतक और मंदिर समिति ने पूर्व में प्रशासन को आवेदन देकर अंदेशा जाहिर कर चुके थे। समय रहते कारवाई होती तो हत्या जैसी घटना टाली जा सकती थी। मौत होने पर पुलिस ने हत्यारों के विरुद्ध एटोँसिटी एक्ट के तहत एवं आईपीसी विभिन्न धाराओं के साथ 302 का मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन फिर भी कहना पड रहा है कि कानून और सरकार के बीच में क्या चल रहा है कि अनुसूचित जाति वर्ग के अहिरवार समाज को बिशेष रूप से टारगेट कर सवणों द्रारा प्रदेश भर में अत्याचार किया जा रहा है। प्रशासन में भी जातिभिमानी ऐसे सवणों को पदस्थ किया गया है कि वह कमजोर अनुसूचित जाति वर्ग के अहिरवार का शोषण कर रहे है।
विदेशी जिला के पिकलौन की घटना को लेकर वहां के समाजसेवियों ने शासन और प्रशासन को निस्पक्ष जांच करने की मांग की है। तथा शेष आरोपियों पर भी मामला दर्ज कर उन्हें भी जेल भेजा जाये। ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो सके। शासन का काम प्रशासन के जरिए अपराध रोकने का होता है वह शीघ्रता से किया जाये। जनता सब देख रही है, वैसे भी कोरोना का रोना है। कहीं सडयंत्र और पाप का घडा फूट न जाये।

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