राज्यपाल ने गहलोत सरकार को बताए खुद के अधिकार, भेजा 6 पेज का नोट !उज्जैन संभाग ब्यूरो चीफ एस एस यादव

जयपुर। विधानसभा सत्र को लेकर राज्यपाल कलराज मिश्र और अशोक गहलोत सरकार के बीच टकराव लगातार जारी है। टकराव के बीच एक तरफ जहां मुख्यमंत्री सहित अन्य कांग्रेस नेता राज्यपाल पर हमला बोल रहे हैं,वहीं दूसरी तरफ बुधवार को राजभवन की तरफ से एक बयान जारी कर राज्यपाल के अधिकार और संविधान के बारे में बताया गया। राज्यपाल ने अपने अधिकारों एवं संविधान में उल्लेख तथ्यों को लेकर गहलोत सरकार को नोट भी लिखा है ।राजभवन की तरफ से जारी बयान के अनुसार 25 जुलाई को राज्य सरकार की तरफ से विधानसभा सत्र बुलाने का जो प्रस्ताव भेजा गया था,उसके बारे में राज्यपाल की तरफ से कुछ सूचनाएं मांगी गई थी । लेकिन सरकार ने सूचना देने के बजाय राज्यपाल के अधिकार बता दिए ।अल्पावधिक में सत्र बुलाने का कारण राज्यपाल की तरफ से पूछा गया तो सरकार की तरफ से जवाब दिया गया कि राज्यपाल मंत्रिमंडल का निर्णय मानने के लिए बाध्य है । उन्हे यह जानने का अधिकार नहीं कि सत्र जल्द बुलाने का निर्णय किस वजह से किया जा रहा है ।राज्यपाल की ओर से सरकार को भेजे गए 6 पेज के नोट में संविधान के अनुच्छेद 174 (1) की पूरी व्याख्या की गई है । इसमें साफ लिखा गया है कि विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल को विधानसभा सत्र संविधान की भावना के अनुरूप बुलाना होगा । इसके लिए सभी सदस्यों की उपस्थिति व उनकी सुरक्षा सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा । राज्यपाल ने नबाम राबिया मामले का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की जानकारी भी सरकार को दी है ।राज्यपाल ने लिखा,विधायक बाड़े में बंद है राज्यपाल ने लिखा कि विधायक राज्य और उसके बाहर विभिन्न होटल में बाड़े में बंद है ।ऐसे में उनकी विधानसभा में उपस्थिति बिना हस्तक्षेप के काम,उनकी इच्छा और बिना रोकटोक के आवागमन कराना राज्यपाल का सैंवधानिक कर्तव्य है । राज्यपाल ने लिखा कि कोरोना महामारी चरम पर है । सत्र आहूत होने पर 200 विधायक और करीब 1000-1200 सरकारी अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहेंगे । ऐसे में इतने लोगों का जीवन खतरे में नहीं ड़ाला जा सकता । राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि उपरोक्त परिस्थितियों में राज्य सरकार वर्षाकालीन सत्र को 21 दिन के नोटिस पर बुलाए ।

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