चीचली के स्वतंत्रता आंदोलन में “वीर गाथा” अमर शहीद मनीराम अहिरवार की – –


संक्षिप्त विवरण =जन्म तिथि :21 नबम्वर 1915 (शरद पूर्णिमा) शहादत दिवस =23 अगस्त 19 42 जन्म स्थान =चीचली तहसील गाडरवारा जिला नरसिंहपुर (मध्यप्रदेश) माता पिता चीचली गौड़वाना राजमहल के सेवादार।
गौरव गाथा


वीर मनीराम अहिरवार जी जन्म से ही निर्भीक, बहादुर, बलशाली बालक थे। जो अपने पिता श्री हीरालाल अहिरवार जी की भांति लाठी, पत्थर और तीर कमान चलाने की कला में माहिर थे। पहलवानी के हर दांव पेंच में ऐसे कई पूरे गाँव में इनकी शानी का दूर दूर तक नहीं। अखाड़े में उस्ताद की उपाधि प्राप्त थी।
गोंड महल के सेवादार


मध्यप्रदेश में गोंड साम्राज्य था, छोटे – बड़े रजवाड़ों में राज्य स्थापित थे। गढ़ा मंडला रानी के अधीनस्थ जबलपुर, चौगान किला के साथ ही चीचली का राजमहल गोंड राजा श्री शंकर प्रताप सिंह जू देव के चालीसा गांव का राजस्व आता था। जो जिला नरसिंहपुर के बड़े गोंड राज्य घराने में थे। जिनके पिताजी के निधन होने के बाद श्री शंकर प्रताप सिंह ही चीचली उत्तराधिकारी के रूप राजा थे। क्योंकि ये एकमात्र पुत्र ही थे, ये उन दिनों शिक्षा अध्ययन हेतु बाहर थे। राजमहल की सुरक्षा व्यवस्था का प्रमुख देखभाल वीर मनीराम अहिरवार संभाल रहे थे। उस समय अंग्रेजी सेना ने महल पर चढाई करने की योजना बनाई।
गोंड राजमहल की सुरक्षा में अंग्रेजी सेना से युद्ध


चीचली राज दरबार की गद्दी उस समय रिक्त थी। महल को सूना होने का समाचार सुन अंग्रेजी सेना ने गुप्त रूप से महल पर कब्जा करने की मंश से चढ़ाई कर दी। इस दौरान वीर मनीराम जी अकेले अपनी दम से युद्ध की कमान संभालने का निश्चय किया। उन्होंने अपने अचूक निशाने बाजी से पत्थरों से विदेशी सेना पर वार कर लहू-लुहान कर घायल कर चीचली से खदेड़ दिया। महल की सुरक्षा अकेले ही अपना सीना तान कर उनकी गोलियों से सामना किया। वीर मनीराम जी पर चली गोली साथी मित्र वीर मंशाराम जसाटी पर लगीं और वह शहीद हुए। इनकी वीरोचिंत अवस्था देख मनीराम अहिरवार ने धुआंधार पत्थर चला कर सेना को घायल कर दिया। मनीराम जी पर अनेक फायर किये। एक गोली इनके पास खड़ी वीरांगना गौराबाई जी को लगी और वह भी शहीद हुई। मनीराम जी के नेतृत्व में हुआ युद्ध में विजय प्राप्त कर विजयी जुलूस निकाला गया। जो गाँव में भ्रमण कर देशभक्ति के जय जय कार के नारों से पूरा गांव मनीराम अहिरवार अमर रहे से और मंशाराम जसाटी जी वीरांगना गौराबाई जी के स्वागत में खुशियां मनाई जा रही थी।
अंग्रेजी सेना के उनकी जेल में ही शहादत दी


चीचली मैं अंग्रेजी सेना से युद्ध जीत कर मनीराम अहिरवार पूरी तरह से जागृत रहे कि अंग्रेजी सेना पुनः महल में कब्जा हेतु प्रयास न कर सके। अतः वीर मनीराम जी ने चीचली राजा साहब को खबर दी। मनीराम अहिरवार की बहादुरी पर प्रसन्न होकर राजा साहब ने जीवन भर चीचली मैं रहने हेतु भूमि दान में देकर मनीराम अहिरवार जी की सराहना की। मनीराम अहिरवार जी के उत्तराधिकारी स्व. श्री गरीबदास अहिरवार जी को चीचली मैं ही दस एकड़ जमीन कृषि कर जीवन यापन करने के लिए दान में दी गई थी। श्री गरीबदास अहिरवार जी को दान स्वरूप भूमि में आज गांव की आबादी बस जाने से पूरा परिवार भूमिहीन और रोजगार विहीन है।
अंग्रेजी सेना ने वीर मनीराम अहिरवार को गुलामी और बेगारी कराने के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। अंग्रेज चाहते थे कि मनीराम और उनकी समाज के नव युवक हमारी गुलामी करने की शर्त स्वीकार कर लें। उन दिनों गांव में आवागमन के साधन नहीं थे। अतः वह मनीराम जी से और अनुसूचित जाति से एक गांव से दूसरे गांव बोझा अंग्रेजी सेना के ठोने की गुलामी करे। वीर मनीराम जी ने एक भी शर्त नहीं मानी तो अंग्रेजी सेना ने उनकी जान से मारने की यातना देकर अपनी जेलखाना में ही दफन कर दिए गए। वीर मनीराम जी ने अपने देश, वतन और सामाजिक स्वाभिमान के खातिर आजादी के स्वतंत्रता आंदोलन में सन 1942 में शहादत देकर अमर गाथा का इतिहास रच दिया था। उनकी वीरता का गुणगान प्रति वर्ष चीचली मैं शहीद नगरी में श्रध्दांजलि आयोजन में उनका पुण्य स्मरण किया जाता है।
अतः रामनारायण पंचांग में महान देशभक्त, स्वतंत्रता सेनानी, वीर मनीराम अहिरवार जी की जन्म तिथि और शहादत दिवस फोटो सहित वर्ष 2023 के पंचांग में प्रकाशित करने का कष्ट करें।
सधन्यवाद।।
🙏निवेदक 🙏लेखक 🙏
मूलचन्द मेधोनिया (शहीद सुपौत्र) अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी
चीचली तहसील गाडरवारा जिला नरसिंहपुर मोबाइल 8878054839

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