क्लाइमेट स्मार्ट विलेज योजना से किसानों की लागत हुई कम और मुनाफा हुआ ज्यादा


फसलों तक पानी पहुँचा, सिंचाई की समस्या दूर हुई, मुफ्त उन्नत बीज मिले, खेतों में लाइनिंग फार्म पोंड बने और कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन से राजगढ़ के किसानों की खेती- किसानी की राह आसान हुई। “क्लाइमेट स्मार्ट विलेज योजना’ में राजगढ़ के श्री जसमाल सिंह, श्री शंकर सिंह और श्री मांगीलाल की खेती से जुड़ी दिक्कतें कृषि अधिकारियों से मिली सलाह से दूर हो गईं। अब वे यूरिया और अन्य खाद का संतुलित मात्रा में प्रयोग कर ब्रॉड बेड फरो विधि से ज्यादा उत्पादन लेते हैं।

राजगढ़ जिले के ग्राम फतेहपुर के भील कृषक श्री जसमाल सिंह के पास 0.519 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे मक्का की फसल देशी बीज छिड़काव विधि से बोते थे। बीज के अधिक मात्रा में उपयोग से खर्च अधिक और लाभ कम होता था। क्लाइमेट स्मार्ट विलेज परियोजना में श्री जसमाल ने मक्का की बोनी में लीफ कलर चार्ट के अनुसार यूरिया की संतुलित मात्रा का उपयोग किया, जिससे यूरिया की काफी बचत हुई। ब्रॉड बेड फरो विधि से मक्का की बोनी से सूखे की स्थिति में भी कम नुकसान हुआ। अतिरिक्त वर्षा का पानी नाली की सहायता से खेत से बाहर निकल गया जिससे फसल खराब होने की संभावना काफी कम हो गई।

श्री जसमाल के खेतों में विगत वर्ष की तुलना में लगभग 12-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ज्यादा उत्पादन हुआ। प्रति क्विंटल 1800 रुपये की दर से फसल बेचने पर उन्हें 15 से 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है।

इसी तरह विकासखण्ड राजगढ़ के ग्राम भाटपुरा के श्री शंकर सिंह ने अपनी 2 हेक्टेयर कृषि भूमि पर पानी की समस्या हल कर ली है। उन्होंने लाइनिंग फार्म पोंड बनवाया, जिससे खेतों की सिंचाई के लिए आसानी से पानी सुलभ हुआ। पैदावार में बढ़ोत्तरी होने से अब वे ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

विकासखण्ड राजगढ़ के ही कृषक श्री मांगीलाल की ग्राम बेडाकापुरा के पास 0.450 हेक्टेयर भूमि पर सोयाबीन की खेती के लिए कृषि विभाग द्वारा सोयाबीन के नि:शुल्क उन्नत बीज और मार्गदर्शन दिया गया। नतीजे में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष उन्होंने 6 से 8 क्विंटल का अधिक उत्पादन लिया। मांगीलाल को प्रति क्विंटल साढ़े 3 हजार के मान से 17 से 23 हजार रुपये तक की अधिक आमदनी हुई है।


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