नेशनल टेक्नोलॉजी डे आज बच्चों में मनोविज्ञान के अनुसार बिना डरे सावधानी रखने की आदत डालें संक्रमण से बचाने बच्चों को मनोवैज्ञानिक तरीके से तैयार करें : सारिका घारू

DG NEWS SEHORE

सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट

सीहोर । नेशनल टेक्नालॉजी डे पर नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बच्चों को कोविड संक्रमण से दूर रखने के उपायों पर अपने कोविड- बाल जागरूकता कार्यक्रम की शुरूआत की। सारिका ने बताया कि बच्चों को कोविड अप्रोपरियेट बिहेवियर अपनाने की पूरी जिम्मेदारी अब पालकों की है क्योंकि इन परिस्थितियों में छोटे बच्चों के स्कूल जल्द खुलने की संभावना कम ही है। बच्चों के घर आंगन में खेलते समय या आसपास के बच्चों से बातचीत करते समय सभी सावधानियों को रखना होगा। बच्चों का मनोविज्ञान को के अनुसार उन्हें बिना भय पैदा किये सावधानी रखने की आदत बनानी पड़ेगी। आगे बताया कि बच्चों के लिये विशेष प्रकार के आकर्षक मास्क, आकर्षक डिजाईन वाली सेनिटाईजर बोतल, साबुन, तौलिया, गेम को विकसित करने की जरूरत है। बच्चों के लिये टीवी पर उनकी रूचि के कार्यक्रमों को बढ़ाना होगा ताकि वे प्रसन्न रहते हुये घर पर रहकर संक्रमण से बचे रहें। संक्रमण कम होने के बाद भी बच्चों के टीके मंजूरी होने तक विशेष व्यवहार परिवर्तन की जरूरत है। एवम जनता फर्फ्यू और ग्रीष्मकालीन अवकाश की असमंजस बीच बच्चों को दादा-दादी की कथाये तो सुनायें जरूर लेकिन अब उनका संदेश होगा कोविड का अंत – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा

क्यो मनाया जाता है नेशनल टेक्नोलॉजी डें

सारिका ने बताया कि 11 मई 1998 को किये गये पोखरण के सफल परमाणु परीक्षण के बाद भारत के वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों की तकनीकी क्षेत्र में सफलता को मनाने हर साल टेक्नालॉजी डे मनाया जाता है। इस साल की थीम टिकाऊ भविष्य के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी रखा गया है।

क्यो जरूरी है बाल जागरूकता कार्यक्रम की

सारिका ने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा चेतावनी दी गई है कि पूर्ण टीकाकरण होने तक अगर नागरिकों ने कोविड से बचाव के लिये मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग एवं सेनिटाईजेशन के साथ अनावश्यक भीड भाड को नहीं रोका तो तीसरी लहर की आशंका है। इसमें बच्चों प्रभावित हो सकते हैं। वर्तमान में बच्चों के लिये किसी टीके को मंजूरी भी नहीं मिली है।

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