महिलाओं को कानून का ज्ञान होगा तो घरेलू हिंसा से बच सकेगीः गुप्ता

DG NEWS SEHORE

सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट 8871288482

सीहोर आष्टा । किसी महिला को शारीरिक पीड़ा देना जैसे मारपीट करना, धकेलना, ठोकर मारना, किसी वस्तु से मारना या किसी अन्य तरीके से महिला को शारीरिक पीड़ा देना शारीरिक हिंसा के तहत आता है। किसी महिला या लड़की को किसी भी वजह से अपमानित करना, उसके चरित्र पर दोषारोपण लगाना, शादी मर्जी के खिलाफ करना, आत्महत्या की धमकी देना, मौखिक दुर्व्यवहार करना। पति द्वारा बात न करना, बच्चे न होने के लिए ताना मारना, बेटी पैदा होने पर बातें सुनाना, बेटा पैदा करने के लिए फोर्स करना, दूसरी शादी की धमकी देना, मजाक उड़ाना या फिर ऐसा कोई भी हाव-भाव जो महिला को अपमानित महसूस कराए। यह घरेलू हिंसा में आता है। इस संबंध में संबंधित महिला या फिर जिसको जानकारी में है वह भी शिकायत कर कार्रवाई करा सकता है। महिला को अगर वकील की आवश्यकता है तो निश्शुल्क वकील भी उपलब्ध कराया जाता है।उक्त बातें होली एंजल्स विद्यालय में विधिक साक्षरता शिविर को संबोधित करते हुए प्रथम श्रेणी न्यायाधीश आयुषी गुप्ता ने कहीं। उन्होंने यह भी बताया कि घरेलू हिंसा जिस महिला के साथ हो रही है, वहीं इस बात की शिकायत करे, यह जरूरी नहीं। महिला को जानने वाला कोई भी व्यक्ति इस बात की शिकायत कर सकता है और शिकायत करने वाले व्यक्ति को पूरी सुरक्षा दी जाएगी या फिर शिकायत करने के लिए महिला सीधे कोर्ट भी जा सकती है। वैसे तो घरेलू हिंसा के केस में वकील की जरूरत नहीं होती, फिर भी लीगल एक्ट के तहत निश्शुल्क वकील मिल सकता है। शिविर का संचालन प्राचार्य शिबी वारगेसे ने किया। उक्त शिविर में संदीप परिहार, अजब सिंह राजपूत विकासखंड स्त्रोत समंवयक, मनोहर सिंह राठौर, विद्यालय का समस्त स्टॉफ व सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिविर के अंत विद्यालय के प्राचार्य द्वारा शिविर के संबंध में आभार व्यक्त किया गया।

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