Shahdol:- कंचे आकार के गिरे ओले, फसलों का हुआ नुकसान sulekha kushwaha shahdol; जिले में हुई बेमौसम की झमाझम बारिश, 24 घंटे में जिले में दर्ज हुई

शहडोल. जिले में बुधवार को एक बार फिर मौसम ने करवट बदली और सुबह से बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। जिले के ब्यौहारी जैतपुर तहसील क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई है, वहीं ब्यौहारी तहसील क्षेत्र में सुबह 15 से 20 मिनट तक कंचे साइज के ओले भी गिरने की खबर है। पिछले 24 घंटे में जिले में कुल 21 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। हांलाकि इसके बाद भी संभागीय मुख्यालय सहित जैतपुर तहसील क्षेत्र में बारिश होती रही है। इस प्रकार मौसम बिगडऩे से जहां एक ओर खेतों व खलिहानों में रखी फसलों पर इसका विपरीत असर पड़ा है। वहीं दूसरी ओर ठंड एक बार फिर बढ़ गई है। मौसम के यह हालात 23 जनवरी को भी बने रहेंगे। गौरतलब है कि मौसम के बदले मिजाज के लक्षण पिछल दो दिनों से दिख रहे थे और आसमान पर बादलों की आवाजाही से बारिश की पूरी संभावना बन रही थी। जिसका असर जिले की ब्यौहारी तहसील क्षेत्र में मंगलवार की रात से शुरू हुआ। संभागीय मुख्यालय में भी बुधवार को आसमान पर सुबह से ही बादलों का डेरा जमा रहा और 11 बजे से बूंदाबांदी शुरू हो गई। बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम ताममान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। जो सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।
अब ऐसे गिरेगा तापमान
दिनांक अधि. न्यून.
23जन. 22 05
24जन. 22 04
25जन. 21 04
ओलावृष्टि से बढ़ गई गलन
ब्यौहारी. बदलते मौसम के कारण ब्यौहारी तहसील क्षेत्र में गलन के साथ ठंड भी बढ़ गयी है। बताया गया है कि बुधवार को भोर से ही मौसम मे अचानक बदलाव हुआ और काफ ी बड़ी-बड़ी बूँदों के साथ आसमान से ओलों की वृष्टि हुई। गिरते ओलों को देखते-देखते पूरी धरती में एक परत जम गइ और गलन के साथ लोगों को ठंड का भी एहसास होने लगा। लोगो का मानना हैं कि इस तरह से मौसम का एकाएक बदलना मानव जीवन को प्रभावित करता है लोगों के बीमार होने के आसार भी बढ़ जाते हैं।
इनका कहना है
ओलावृष्टि निश्चित ही खेतों में खड़ी फसलों के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे गेंहूं व चना की फसल जमीन पर बिछ जाती है और दलहनी फसलों व सब्जियों के फली व फूल झर जाते हैं। मौसम के बार-बार मिजाज बदलने से दलहनी व तिलहनी एवं सब्जीवर्गीय फसलों में बीमारियां व कीट व्याधियां हो सकती है। जिसकी किसान सतत निगरानी करते रहे और लक्षण दिखाई देने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर उसका उपचार करें।
डॉ. पीएन त्रिपाठी, मृदा वैज्ञानिक, केव्हीके, शहडोल

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