मध्‍यप्रदेश वासियों को शराबी बनाना चाहते हैं आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा

नई शराब नीति 01 अप्रैल से होगी शूरू, मंत्री जी के होंगे वारे-न्‍यारे
विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन
मध्यप्रदेश में 01 अप्रैल से शराब सस्ती होने वाली है। क्या देसी, क्या विदेशी सब शराब सस्ते में मिलेगी। क्‍योंकि आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश में ऐसी शराब नीति बना दी है कि अब शराब आमजन के बजट में आ जायेगी। मतलब साफ है कि मंत्री जी को शराब से होने वाले सामाजिक अपराधों से कोई वास्‍ता नहीं रहेगा। वह तो सस्‍ती शराब बेचकर अपने वारे-न्‍यारे करना चाहते हैं। समाज को शराबी बनाने के लिए आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने एक बड़ा षड्यंत्र रच दिया है। सामाजिक विशेषज्ञों के अनुसार कोई भी नशा वाली वस्तुओं की एक्सेसिबिलिटी आम जनता से दूर होनी चाहिए। पर मध्यप्रदेश में तो “नई शराब नीति” तो उल्टी गंगा समान है। इसका श्रेय माननीय मंत्री महोदय को जाता है।
वहीं दूसरी ओर प्रदेश में शराबबंदी की मांग वर्षों से की जाती रही है। प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री उमा भारती कई बार मंचों से मध्‍यप्रदेश में शराबमंदी की वकालत भी कर चुकी हैं। लेकिन मंत्री जी को इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है। उन्‍होंने ने तो नई सस्‍ती शराब नीति बनाकर एक तरह से उमा भारती को ही नीचा दिखाने का प्रयास किया है। यह भी गौर करने लायक है कि बीजेपी के ही एक प्रदेश गुजरात में कई वर्षों से पूर्णत: शराबबंदी है। पर मध्‍यप्रदेश में इसके उलट हो रहा है। यहां पर तो शराब को बढ़ावा दिया जा रहा है। पहले से ही प्रदेश में दिनोंदिन शराब की विक्री बड़ती जा रही है। अब 01 अप्रैल से जब शराब सस्‍ती होगी तो निश्चित ही इसका सेवन करने वालों की संख्‍या बढ़ेगी। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस शराब नीति पर जरूर गौर करना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान समाज से सरोकार रखने वाले मुख्‍यमंत्री हैं। इस तरह की नीति का आना प्रदेश के लिए, समाज के लिए बहुत नुकसान देने वाला होगा। पूरा प्रदेश ही शराब के आगोश में समा जायेगा। ऐसी नीति पर उन्‍हें जरूर सोचना चाहिए। नहीं तो इससे पूरे प्रदेश में सरकार की किरकिरी होगी और बैठे बिठाये विपक्ष को सरकार को घेरने का अवसर मिल जायेगा।
शराब नीति में भोपाल और इंदौर के बच्चों के लिए माइक्रो-ब्रीवरी का भी उल्लेख है। युवा को शराब के प्रति ग्लैमरस बनाने का षड्यंत्र मंत्री देवड़ा रच रहे हैं, वो भविष्य में घटक होगा। सवाल यह उठता है कि ऐसी शराब नीति बनी ही क्यों? आबकारी मंत्री वैसे भी भ्रष्ट मंत्रियों में गिने जाते हैं। वित्त विभाग की ट्रांसफर पोस्टिंग पूर्व में मंत्री अपने पीए विजयवर्गीय के माध्यम से कराते थे। मंत्री बंगले में अंदर के कमरे में किसके पास पैसे जाते हैं यह समूचे प्रदेश को मालूम है। उससे से भी पेट नहीं भरा तो पूरे समाज को ही शराबी बनाने का षडयंत्र रच दिया।
घर-घर बार योजना- शराब नीति का खतरनाक पहलू घर-घर बार योजना भी है। आप 50,000 रुपए दीजिए और घर पर निजी बार बनाइए और तो और आपको परेशानी ना हो तो शराब रखने की सीमा भी इस शराब नीति में बढ़ाई गई है। इसका साफतौर पर अर्थ है कि इस लाइसेंस की अनुशंसा के लिए मंत्री बंगले में जबरदस्त भीड़ बढ़ जाएगी और इससे मंत्री जी की कमाई में जबरदस्त इजाफा होगा।
आदिवासी समाज होगा प्रभावित- शराब नीति एक खतरनाक पहले आदिवासी क्षेत्रों में महुआ की शराब अब आम आदिवासी बनाकर बेच सकेगा। इससे प्रदेश के 1.83 करोड़ आदीवासी समाज भयंकर रूप से प्रभावित होगा। इनका उत्थान कही से भी शराब के माध्यम से नहीं होने वाला। आदिवासी समाज खासतौर पर मध्यप्रदेश में इस शराब नीति से प्रभावित होगा।

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