मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan ने कवि रहीम की जयंती पर

निवास कार्यालय स्थित सभागार में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-ख़ाना या रहीम दास, मध्यकालीन कवि, दानवीर, बहुभाषाविद, कलाप्रेमी एवं विद्वान थे।

वे भारतीय संस्कृति के अनन्य आराधक तथा सभी संप्रदायों के प्रति समादर भाव के सत्यनिष्ठ साधक थे। वे कलम और तलवार के धनी थे और मानव प्रेम के सूत्रधार थे।

रहीम दास जी हिन्दी साहित्यिक जगत के महान कवियों में से एक थे। वे जीवनभर हिंदू जीवन को भारतीय जीवन का यथार्थ मानते रहे। रहीम ने काव्य में रामायण, महाभारत, पुराण तथा गीता जैसे ग्रंथों के कथानकों को उदाहरण के लिए चुना और लौकिक जीवन व्यवहार पक्ष को उसके द्वारा समझाने का प्रयत्न किया है।

कवि रहीम का जन्म 17 दिसम्बर सन 1556 में हुआ था। रहीम ने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में ही कविता की है जो सरल, स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण है। कवि रहीम के काव्य में मुख्य रूप से श्रृंगार, नीति और भक्ति के भाव मिलते हैं। 70 वर्ष की उम्र में अक्टूबर 1626 ई. में रहीम का देहांत हुआ।

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