युवा क्षितिज जैन ने किया पर्युषण पर्व का पालन


सुसनेर। प्राय यह कहा जाता है कि युवा धर्म से विमुख होता जा रहा है लेकिन हम पिछले कई वर्षों से यह देख रहे हैं कि बाल्यावस्था किशोरावस्था युवावस्था के नए बच्चे बच्ची शिक्षा के क्षेत्र में तो सफल हो ही रहे हैं लेकिन धर्म, आध्यात्मिक एवं त्याग के क्षेत्र में भी बेहद सफल हो रहे हैं। भगवान पारसनाथ भगवान की एवं सभी वरिष्ठ जनों के आशीर्वाद, प्रेरणा, मार्गदर्शन एवं पूजनीय मां विशुद्ध मति माताजी आचार्य गुरुवर सुंदर सागर जी महाराज जी की आशीर्वाद एवं प्रेरणा से बालक क्षितिज पिछले 4 वर्षों से पर्युषण पर्व में निरंतर परिवर्तित क्रमसे पांच उपवास एवं पांच वृत्त की कठिन साधना हरी सब्जी मैं गिलकी को छोड़कर शेष सभी का त्याग गेहूं व मूंग की दाल छोड़कर शेष सभी का त्याग पिछले 4 वर्षों से निरंतर पर्यूषण पर्व में एक उपवास एक व्रत निरंतर कर रहा है जो कि सभी जैन बन्धुओ के लिए एक आदर्श प्रेरणा स्त्रोत है। जैन समाज के युवा तरुणाई क्षितिज के द्वारा जैन धर्म के प्रति इसी प्रकार से प्रेरणा बनाए रखना समाज के और भी युवा जो तप आराधना में लीन है उन सभी के लिए आदर्श स्थापित किया है।

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ना डरते हैं ना डराते हैं सच सबके सामने लाते हैं
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