टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब बना रहा है भारत के लिए सुरक्षित साइबर भविष्य का रास्ता

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के द्वारका स्थित मुख्यालय में एक सर्विलांस सिस्टम को लगाया गया है, जिसका काम अपने नेटवर्क में शामिल सभी कंप्यूटरों की स्थिति पर नजर रखना है। सर्विलांस सिस्टम, इन कंप्यूटरों में हैकिंग, मालवेयर की कोशिशों या खराब प्रोग्राम के उपयोग की जानकारी को सामने लाता है।

2021 में लगाए गए सी3आई वज्र नाम के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (एसओसी) ने देशभर के हाईवे पर निगरानी रखने वाले कंप्यूटरों को सुरक्षित रखा है और संभावित खतरों के बारे में चेतावनी भी दी है।

सी2आई वज्र, घटना के समय ही जानकारी इकट्ठी कर जांच-निगरानी की व्यवस्था उपलब्ध करवाता है, साथ ही अंतिम बिंदुओं से लॉग फीड, नेटवर्क व इंटरनेट से पैकेट डेटा भी उपलब्ध करवाता है। फिर इन फीड के जरिए खतरे से जुड़ी सूचनाएं उत्पादित करता है और संगठन के नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इस समाधान के बड़े लाभों में शामिल हैं- घटना की प्रतिक्रिया में कार्यकुशलता बढ़ोत्तरी और सुरक्षा उल्लंघनों का प्रभाव कम हुआ है, बेहतर ढंग से अब घटनाओं की जानकारी और इनके बारे में अधिसूचना जारी हो पा रही है। साथ ही अब उन्नत लॉग विश्लेषण और प्रतिधारण बेहतर हो रहा है।

‘ओपन सोर्स कंपोनेंट और इंटीग्रेशन’ पर पूरी तरह आधारित, पहले एसओसी को ‘साइबर फिजिकल सिस्टम्स टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआईएच) या सी2आईहब’ ने विकसित किया है, आईआईटी कानपुर में स्थित यह संस्थान देश में साइबर सुरक्षा में शोध और विकास का काम करता है।

पिछले दो सालों में बहुविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों के राष्ट्रीय मिशन (एनएम-आईसीपीएस) के तहत विज्ञान एवम् प्रौद्योगिकी विभाग की सहायता से टीआईएच ने अपना ध्यान अहम अवसंरचना, मोबाइल उपकरणों की सुरक्षा, कंप्यूटर डेटा सुरक्षा के लिए ब्लॉकचेन या डिजिटल लेजर आधारित समाधान और डेटा की निजता पर केंद्रित रखा है। इसने कई स्टार्टअप को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी मदद की है, इसमें कई ऐसे स्टार्टअप हैं, जो सी3आई हब  में निर्मित तकनीक को बाजार तक पहुंचाते हैं।

संस्थान द्वारा ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित एक “सेल्फ सोवरीन आईडेंटिटी (एसएसआई)” सिस्टम भी विकसित किया है। एसएसआई एक ऐसी तकनीक है, जो उपयोगकर्ताओं को यह नियंत्रण देती है कि वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी को कहां और कैसे उपयोग करें। उपयोगकर्ताओं को यह नियंत्रण हासिल करवाने के लिए एसएसआई, ब्लॉकचेन, डिजिटल हस्ताक्षर और शून्य ज्ञान साक्ष्य जैसी अलग-अलग तकनीकों के मिश्रण का उपयोग करती है। व्यापक स्तर की व्यक्तिगत जानकारी, जिसमें डिग्री, सर्टिफिकेट और पहचान पत्र शामिल होते हैं, उन्हें सुरक्षित ढंग से इकट्ठा रखने के लिए एसएसआई का उपयोग किया जाता है।

सी3आईहब द्वारा डिग्रियां देने के लिए एक एसएसआई आधारित एक तंत्र विकसित किया गया था, इसे आईआईटी द्वारा प्रोत्साहित स्टार्टअप सीआरयूबीएन तैनात कर रहा है। प्रधानमंत्री ने आईआईटी कानपुर के स्नातक छात्रों को इस प्रणाली से डिग्रियां दी थीं। इस प्रणाली से पीएम बाल पुरस्कार और इग्नू की डिग्रियां भी दी गई हैं।

https://i0.wp.com/static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001Q8K9.jpg?w=810&ssl=1https://i0.wp.com/static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image002QEKB.jpg?w=810&ssl=1

सी3आईहब ने सीआरयूबीएन के जरिए कर्नाटक के 6 जिलों में ब्लॉकचेन आधारित भूमि रिकॉर्ड की तैनाती की है, इसे आगे और भी जिलों में उपयोग किया जाएगा।

टीआईएच फिलहाल संचार मंत्रालय के साथ मिलकर अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए मोबाइल फोन डेटा को सुरक्षित रखने के सुझावों के गठन के साथ, स्मार्टफोन की सुरक्षा का विश्लेषय़ करने के लिए उपकरण विकसित करने पर काम कर रहा है। यह गृह मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, आारबीआई और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ उनकी साइबर सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भी काम कर रहा है।

Leave a Reply