जिला अस्पताल में हर माह 5 लाख रुपये खर्च फिर भी सफाई बदहाल

DG NEWS VIDISHA

संवाददाता सुरेश मालवीय 8871288482

विदिशा । दो साल पहले शुरू हुए श्रीमंत माधवराव सिंधिया जिला अस्पताल में हर माह 5 लाख रुपये सफाई व्यवस्था पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन अस्पताल की सफाई व्यवस्था बदहाल है। हालात यह है कि कई वार्डों में तो मरीजों को वार्ड के बाहर बैठकर समय बिताना पड़ रहा है। इधर सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे सुपरवाईजर वीरभान सिंह का कहना है कि सफाई कर्मियों की कमीं के चलते सफाई के नाम पर वह भी खाना-पूर्ति ही करा रहे हैं। इस संबंध में अस्पताल के सिविल सर्जन डा. संजय खरे का कहना है कि उन्होंने सफाई व्यवस्था के लिए बजट मांगा है। कलेक्टर के माध्यम पत्र भेजा गया है। बता दें कि दो साल पहले ही 144 करोड़ रूपये की लागत से बने पांच मंजिला जिला अस्पताल में तीन मंजिल के विभिन्ना वार्डों, गेलरी और शौचालयों की सफाई के लिए अस्पताल प्रबंधन हर माह 5 लाख रुपये की राशि खर्च कर रहा है, लेकिन हालात यह है कि सफाई के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति हो रही है। खास बात यह भी है कि सफाई कर्मियों के अलावा मशीन से भी अस्पताल में सफाई कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल बनी हुई है। अस्पताल में एक भी ऐसा शौचालय नहीं है, जहां गंदगी की भरमार नहीं हो। शौचालयों से आने वाली बदबू से मरीज भी परेशान रहते हैं। पुरूष सर्जीकल वार्ड में दो बुजुर्ग लंबे समय से भर्ती हैं। बताया जा रहा है कि उनके स्वजन आज तक अस्पताल उन्हें देखने नहीं पहुंचे। उनके द्वार वार्ड में ही गंदगी कर दी जाती है। जिसकी नियमित सफाई नहीं होती। इसी गंदगी के कारण वार्ड में मरीजों का रुकना मुश्किल होता है। बदबू के कारण रात में मरीज वार्ड के दूसरे छोर में जाकर सोते हैं।

प्रशिक्षित नहीं है सफाई कर्मी

केंद्र सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक प्रधानमंत्री कौशल विकास से प्रशिक्षित सफाई कर्मियों से ही सफाई कराई जा सकती है। इसका पूरा प्रोटोकाल होता है उसके मुताबिक सफाई होना चाहिए, लेकिन अस्पताल में जिस निजी कंपनी को सफाई का काम सौंपा गया है उसमें कोई सफाईकर्मी प्रशिक्षित नहीं है। किसी भी सफाई कर्मी से कहीं की भी सफाई करा ली जाती है। जिससे सफाई कर्मी सहित मरीजों में भी इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि अमले को अस्पताल स्तर पर ट्रेंड कर दिया जाता है।

दीवार फर्श ओर शौचालय हो रहे बदरंग

जिला अस्पताल में प्रवेश करते ही गेट से ही गंदगी दिखना शुरू हो जाती है। ऐसा कोई वार्ड, गैलरी, दीवार, शौचायल नहीं जहां तंबाकू और पान की पीक से दीवार बदरंग दिखाई नहीं दे रही हों। कई जगह तो फर्श पर गंदगी की पर्त जम गई हैं। खासकर शौचालयों की हालत ठीक नहीं है। अस्पताल के बीच में खाली पड़े परिसर की तो कभी सफाई होती ही नहीं है जिससे वहां पूरे परिसर में गंदगी की भरमार बनी हुई है।

पानी के लिए आते है पहली मंजिल

दूसरी और तीसरी मंजिल के मरीजों को भीषण गर्मी के दौरान गर्म पानी पीना पड़ रहा है। कहने के लिए हर मंजिल पर वाटर कूलर लगा हुआ है, लेकिन दूसरी और तीसरी मंजिल के वाटर कूलर में पानी ठंडा नहीं हो रहा है जिसके चलते मरीजों को ठंडे पेयजल के लिए पहली मंजिल तक दौड़ लगाना पड़ रही है। यहां पर देखरेख के अभाव में पूरे प्रांगण में पानी भरा रहता है जिससे कई बार मरीज फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं।

इनका कहना है

वार्ड में ठीक से सफाई नहीं होती जिसके चलते यहां आराम करना मुश्किल होता है। बदबू के कारण उन्हें रात में दूसरे छोर में जाकर सोना पड़ता है। वहीं शौचालय इतने अधिक जर्जर हैं कि कभी भी कोई घटना हो सकती है।

-दिलीप अहिरवार, मरीज करैयाखेड़ा

पास के ही पलंग पर दो मरीज गंदगी करते रहते हैं। जिसके चलते वार्ड के बाहर जाकर बैठना पड़ता है। इन्हें अन्य कहीं शिफ्ट किया जाना चाहिए जिससे अन्य मरीजों को असुविधा नहीं हो।

-बब्लू कुशवाह, मरीज ग्राम वन

हम सफाई पर हर माह पांच लाख रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े अस्पताल की सफाई के लिए यह राशि पर्याप्त नहीं है। कम से कम 75 सफाई कर्मियों की जरूरत है, जबकि कंपनी 38 से सफाई करा रही है। हमने कलेक्टर के माध्यम से बजट की डिमांड की है।

-डा. संजय खरे, सिविल सर्जन जिला अस्पताल

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